पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक
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बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि पर गाय का घटिया घी बेचने का आरोप लगा है। कोर्ट ने पतंजलि घी निर्माता और वितरक पर कुल 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। पतंजलि के घी दो लैब में फेल हुए थे। हालांकि, पतंजलि ने इस पर सफाई देते हुए इस आदेश को त्रुटिपूर्ण तथा विधि-विरुद्ध बताया है।
घी के सैंपल की दोबारा जांच के बाद भी फेल हुआ,तब 17 फरवरी 2022 को यह मामला कोर्ट में पेश किया गया था।
जिसका हाल ही में फैसला आया। पिथौरागढ़ के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर/एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट योगेंद्र सिंह की अदालत ने गुरुवार को सुनाया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने कोर्ट में इस मामले से जुड़े सारे सबूत पेश किए थे।
उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने यह फैसला सुनाया है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पतंजलि घी के सैंपल फेल होने पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पतंजलि घी के निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर राज्य और सेंट्रल लैब में घी के सैंपल फेल होने के बाद क्रमशः 1.25 लाख और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जब पतंजलि घी जांच के नतीजे आए तो पता चला कि घी खाने की सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा है। यानी, यह घटिया क्वालिटी का था। उन्होंने यह भी बताया कि लैब रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि इस घी को खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है और लोग बीमार भी हो सकते हैं।
पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की ओर से शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसको लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है। पतंजलि ने अपने बयान में कहा
कोर्ट ने इन सभी प्रमुख तर्कों पर विचार किए बिना प्रतिकूल आदेश पारित किया है, जो विधि की दृष्टि से सही नहीं है। यह आदेश निम्नलिखित कारणों से त्रुटिपूर्ण तथा विधि-विरुद्ध है:
1.रेफरल प्रयोगशाला NABL से गाय के घी के परीक्षण के लिए मान्यता प्राप्त नहीं थी, इसलिए वहां किया गया परीक्षण कानून की दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। यह हास्यास्पद और घोर आपत्तिजनक है कि एक सब-स्टैंडर्ड लैब ने पतंजलि के सर्वश्रेष्ठ गाय के घी को सब-स्टैंडर्ड बताया है।
2.जिन पैरामीटरों के आधार पर नमूना असफल घोषित किया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे, इसलिए उनका प्रयोग करना विधिक रूप से गलत है।
3.दोबारा परीक्षण सैंपल की एक्सपायरी डेट बीत जाने के बाद किया गया, जो कानून के अनुसार अमान्य है।
साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि यह निर्णय RM Value (घी में volatile fatty acids का स्तर) में मामूली अंतर पर आधारित है, जो प्राकृतिक प्रक्रिया है और घी की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं डालता। RM Value क्षेत्रीय आधार पर भिन्न हो सकता है और FSSAI भी इसे समय-समय पर संशोधित करता रहता है। पतंजलि ने अदालत के आदेश के खिलाफ फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील दायर करने की बात कही और विश्वास जताया कि ट्राइब्यूनल में मामला उनके पक्ष में सुलझ जाएगा।
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