Monday , April 20 2026

यूजीसी के नए नियमों को लेकर क्यों हो रहा जोरदार हंगामा

पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक :

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। इन नियमों के तहत प्रत्येक परिसरों में समानता समितियों (इक्विटी कमेटी) का गठन अनिवार्य कर दिया गया है।

हाल ही में, यूजीसी बिल 2026 में पुराने नियमों में बदलाव करके उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा, और यदि कोई संस्थान नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस बिल का उद्देश्य सभी छात्रों के लिए न्यायसंगत और समावेशी शिक्षा का वातावरण तैयार करना है।

नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज को समान अवसर केंद्र या इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर स्थापित करना होगा। इस केंद्र के तहत एक समता समिति बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख करेंगे। इस समिति में वरिष्ठ शिक्षक, सिविल सोसायटी के सदस्य और छात्र शामिल होंगे। यह समिति भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी।
अनुपालन न करने की स्थिति में-
• उच्च शिक्षा संस्थानों को UGC योजनाओं में भाग लेने से वंचित किया जा सकता है। 
• उन्हें डिग्री कार्यक्रम, डिस्टेंस लर्निंग एवं ऑनलाइन कार्यक्रम संचालित करने से रोका जा सकता है। 
• UGC की उच्च शिक्षा संस्थानों की सूची से हटा भी दिया जा सकता है। 

यूजीसी के नए नियमों को लेकर जोरदार हंगामा हो हुआ। जातिगत भेदभाव रोकने का हवाला देकर यूजीसी ने जो नए नियम बनाए हैं उसका यूपी में हर तरफ विरोध होने लगा है। जगह-जगह विरोध में पोस्टर लगाए गए। छात्रों ने इसे भेदभाव बढ़ाने वाला नियम बताया।

यूपी के आगरा, बरेली से लेकर मेरठ तक छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। UGC कानून के विरोध में सवर्ण समाज ने बड़ा प्रदर्शन किया। कई जगह तो स्वर्ण समाज के लोगों ने नारा लगाया कि योगी तुझसे बैर नहीं मोदी तेरी खैर नहीं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह कानून समाज के हितों के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाए। सवर्ण समाज के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांग नहीं मानी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। गोंडा में UGC कानून के विरोध में पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह भी सामने आ गए । उन्होंने यूजीसी के नए नियम को को देश का माहौल खराब करने वाला बताया, उन्होंने कहा ये बिल एकतरफा आया है। एक समाज को अपराधी तो एक को पीड़ित मान लिया गया है।

नए नियमों के खिलाफ सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ हैं. नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है. जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है जिसको लेकर विरोध हो रहा है. सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि इन नियमों का फायदा उठाकर कोई भी छात्र सवर्णों को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर की गई थी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशन, 2026 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कानून के कुछ अहम सवाल भी उठाए है। कोर्ट ने कहा कि रेगुलेशन में “जाति-आधारित भेदभाव” और “भेदभाव” दोनों को परिभाषित किया गया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि रेगुलेशन में “कुछ अस्पष्टताएं” हैं और “इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”। मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि नए नियमों का मसौदा तैयार करते समय कुछ पहलुओं की नज़रअंदाज़ किया गया

अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी और इसे रोहित वेमुला की मां की ओर से 2012 के यूजीसी नियमों को चुनौती देने वाली याचिका के साथ सुनाया जाएगा ।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाने पर
पूर्व सांसद बृजभूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही अच्छा काम किया। माघ मेले में आए साधु संतों ने स्वागत किया है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, देश की सर्वोच्च अदालत का जो भी आदेश होगा वह खुशी की बात है

सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि यह फैसला उनके हितों की रक्षा करने वाला है।सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि आगे भी न्याय मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit exceeded. Please complete the captcha once again.

E-Magazine