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स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना को पीड़ित लोगों का मजाक उड़ना पड़ा भारी

पूनम शुक्ला: मुख्य प्रबंध संपादक :

स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना को सुप्रीम कोर्ट ने खास आदेश दिए हैं। रैना पर स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को पैसे नहीं, सम्मान की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 26 नवंबर को कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना और तीन अन्य कॉमेडियनों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह आदेश क्यूर एसएमए इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर एक मामले में दिया। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने समय रैना समेत अन्य कॉमेडियन्स को दिव्यांग लोगों के लिए एक स्पेशल शो आयोजित करने का आदेश दिया है। जिसमें समय को दिव्यांग जनों के लिए फंड जुटाना होगा। कोर्ट ने कहा कि इन कार्यक्रमों से जुटाई गई धनराशि का उपयोग दिव्यांगजनों के समय पर और प्रभावी उपचार के लिए किया जाना चाहिए।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट इन हास्य कलाकारों पर दंडात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि अगली सुनवाई से पहले कुछ यादगार कार्यक्रम होंगे। आप सभी समाज में अच्छी स्थिति में हैं। अगर आप बहुत लोकप्रिय हो गए हैं, तो इसे दूसरों के साथ साझा करें। रैना को मंच का इस्तेमाल उनकी उपलब्धियों को दिखाने के लिए करने को कहा गया है।

अपने जन्मदिन पर कॉमेडियन समय रैना ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद के बाद विकलांग लोगों पर किए गए अपने चुटकुलों के लिए माफी भी मांगी थी । उनका यह बयान सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना के बाद आया था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जिन कॉमेडियन्स को ये आदेश दिया है, उनमें समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमारजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर, आदित्य देसाई और निशांत जगदीप तंवर शामिल हैं। समय रैना ने अपने एक शो के दौरान स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी से पीड़ित लोगों के ऊपर चुटकुला सुनाया था। अपने इस जोक के कारण वह मुसीबत में आ गए थे।

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