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सपा नेता आजम खान और उनके बेटे को अदालत से मिला एक बड़ा झटका

पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक :

सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को फिर 7-7 साल की सजा हुई है। कुछ समय पहले ही आजम खान जेल से बाहर आए थे और उन्होंने राहत की सांस ली थी। मगर उन्हें आज सोमवार को एक बड़ा झटका लगा है। रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने फर्जी पैन कार्ड मामले में सोमवार को ही दोनों को दोषी करार दिया। सोमवार को पैन कार्ड मामले में दोष सिद्ध होने के थोड़ी देर बाद सजा सुना दी।


इस फैसले के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, क्योंकि आजम खान अभी दो महीने पहले 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। अदालत का यह कठोर निर्णय उनके राजनीतिक और कानूनी सफर में एक और बड़ा मोड़ माना जा रहा है। जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला 9 महीने पहले हरदोई जेल से रिहा हुए थे। MP/MLA कोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड रखने के आरोप में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। फैसले के बाद कोर्ट में ही पुलिसकर्मियों ने आजम खान और अब्दुल्ला को हिरासत में ले लिया है। अब दोनों फिर से जेल जाएंगे।


यह फर्जी पैन कार्ड का मामला 2019 का है। रामपुर में भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में दोनों के खिलाफ केस दर्ज कराया था।आरोप लगाया था कि आजम ने बेटे अब्दुल्ला को चुनाव लड़वाने के लिए दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए। जिसमें आरोप था कि दो अलग जन्म तिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाकर चुनाव के लिए उम्र छिपाई गई। असली जन्म तिथि यानी 1 जनवरी 1993 के मुताबिक, अब्दुल्ला 2017 में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे। उनकी उम्र 25 साल नहीं हुई थी। इसलिए आजम ने दूसरा पैन कार्ड बनवाया, जिसमें उन्होंने जन्म का साल 1990 दिखाया था।अदालत ने भारतीय पासपोर्ट अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं में दोषी पाया और आज़म खान और अब्दुल्ला को 7-7 साल की सजा सुना दी है।शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने फैसले को सत्य की जीत बताया।

भाजपा नेता आकाश सक्सेना के एडवोकेट संदीप सक्सेना ने बताया- आजम और अब्दुल्ला को धारा 467 के तहत 7 साल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा दोनों को धारा 120 बी में एक साल, 468 और 420 में तीन-तीन साल की सजा दी गई है। इसके अलावा कोर्ट ने दोनों को धारा 471 के तहत दो साल की सजा सुनाई है। अगर 5 साल की सजा होती तो कोर्ट उन्हें जमानत पर छोड़ सकता था। क्यों कि वो 5 साल की सजा पूरी कर चुके हैं। लेकिन इस केस में उन्हें 7 साल की सजा हुई है। ऐसे में उन्हें कोर्ट से फिर जेल जाना होगा।

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