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शर्म नहीं आ रही है, बेटी को लड़कों के बीच क्रिकेट खेलने के लिए भेजते हो, वो आज बांट रहे है मिठाई

पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक :

भारतीय महिला क्रिकेट की विजेता टीम में शामिल रहीं साधारण परिवार में जन्मी राधा यादव की जीत पर उनके गांव में जश्न का माहौल है। राधा ने संघर्ष से लेकर चमक तक का सफर तय किया।

विश्व कप के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम विजेता बनी है। टीम इंडिया के महिला विश्व कप में जीत के बाद उनके घर पर सोमवार को खुशी का माहौल रहा । फाइनल में भारत को जीत दिलाने वाली बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाज राधा यादव जौनपुर जिले के अजोशी गांव की रहने वाली हैं। महिला विश्व कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार गेंदबाजी कर उन्होंने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। गली क्रिकेट से शुरुआत कर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने वाली राधा यादव ने समाज के तानों को सहा और गरीबी से भी लड़ी, मगर उसने हिम्मत नहीं हारी अपनी मेहनत के बल पर राधा ने देश का नाम रोशन किया है।

राधा के पिता ओम प्रकाश यादव की फुटपाथ पर पाव, बीड़ी और दूध बेचने का कार्य करते हैं। इसी दुकान से सामान बेचकर बेटियों को आगे बढ़ाया। पिता ने कहा आज वही लोग मिठाई मांग रहे और बांट रहे हैं, जो कल तक मुझसे कहते थे, शर्म नहीं आ रही है, बेटी को लड़कों के बीच क्रिकेट खेलने के लिए भेजते हो। इसी कारण आज तक बेटी गांव नहीं गई है। वह आगे कहते हैं कि राधा जब छोटी थी, तभी से उसका क्रिकेटर बनने का सपना था, बेटी के सपने को साकार करने के लिए कभी गरीबी को आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने कहा यह हमारे लिए गर्व की बात है और राधा ने मेरा ही नहीं, पूरे देश का नाम रोशन कर दिया। अब वह देश की क्रिकेट आइकन बन चुकी हैं। ग्राम प्रधान ध्रुव राज यादव ने कहा कि राधा ने यह साबित किया है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं।

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