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इलाहाबाद हाईकोर्ट से समाजवादी पार्टी को बड़ी राहत

पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक :

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मुरादाबाद में सपा के जिला कार्यालय को खाली कराने के प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया है। इससे मुरादाबाद प्रशासन को तगड़ा झटका लगा है।


हाईकोर्ट के इस फैसले से पार्टी कार्यकर्ताओं को राहत मिली है। मुरादाबाद स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय का आवंटन प्रशासन ने 16 सितंबर को निरस्त कर दिया था। 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए सपा कार्यालय खाली करने पर रोक लगाते हुए 28 अक्टूबर की तारीख तय की थी।यह आदेश जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की डबल बेंच ने दिया।

जिला प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में कहा गया था कि यह भवन नजूल की भूमि पर बना है, जो नगर निगम के प्रबंध क्षेत्र में आती है। आदेश में उल्लेख था कि नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम की टीम भवन पर कब्जा लेगी। 6 अक्टूबर को प्रशासन की टीम सपा कार्यालय खाली कराने पहुंची थी। टीम के पहुंचने से पहले ही सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव, पूर्व विधायक हाजी रिजवान और कई पदाधिकारी बड़ी संख्या में कार्यालय पर मौजूद थे। जिलाध्यक्ष ने 10 अक्टूबर को सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि का हवाला देते हुए फर्नीचर और डॉक्यूमेंट्स हटाने के लिए चार दिन की मोहलत मांगी थी। जिलाधिकारी के आदेश पर प्रशासन ने 10 अक्टूबर तक का समय दिया था, जिसके बाद 11 अक्टूबर को कब्जा लेने की तैयारी थी लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश से कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी।  

इससे पहले 30 जुलाई को भी प्रशासन ने सपा जिलाध्यक्ष को नोटिस जारी कर कार्यालय खाली करने को कहा था। इसके जवाब में सपा जिलाध्यक्ष ने प्रशासन को बताया था कि कार्यालय का किराया नियमित रूप से जमा किया जाता रहा है और पार्टी का कब्जा पूरी तरह वैध है। प्रशासन ने अपने आदेश में शासनादेश का हवाला देते हुए कहा था कि किसी भी भवन का आवंटन अधिकतम 15 वर्ष तक ही वैध रह सकता है, जबकि सपा कार्यालय को तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है। इसी आधार पर आवंटन रद्द करने का निर्णय लिया गया था।पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने 28 अक्टूबर, 2025 तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

बता दें कि सपा का यह कार्यालय बंगला नंबर 4, सिविल लाइंस इलाके में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के सामने चक्कर की मिलक इलाके में है, जिसे 1994 में दिवंगत SP सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को अलॉट कराया था।

सपा ने इस नोटिस को भेदभावपूर्ण और अनुचित बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पार्टी का कहना था कि उन्होंने कभी भी किराए या नियमों का उल्लंघन नहीं किया। सभी बकाया नियमित रूप से जमा किए गए हैं, बावजूद इसके केवल राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है।

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