पूनम शुक्ला: मुख्य प्रबंध संपादक :
इंदौर में देहदानी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का मिला सम्मान
पहली बार देहदानी का ऐसा राजकीय सम्मान के साथ बेहद सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
देहदान करने वाले अशोक वर्मा का ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर राजकीय सम्मान किया गया। इंदौर में यह पहला मौका है जब किसी देहदानी का ऐसा राजकीय सम्मान किया गया। दरअसल मप्र शासन द्वारा 1 जुलाई 2025 को देहदान और अंगदान करने वाले व्यक्ति को राजकीय सम्मान देने के निर्देश दिए गए थे।
शहर में जवाहर मार्ग निवासी मेडिकल व्यवसायी अशोक वर्मा का गुरुवार रात निधन हो गया था।अशोक वर्मा का निधन गुरुवार रात को अधिक उम्र व इससे जुड़ी परेशानियों की वजह से हो गया था । जीते जी उनके लिए गए संकल्प अनुसार उनके परिजन ने देहदान, नेत्रदान और त्वचा दान के लिए तत्काल दधीचि मिशन से संपर्क किया लेकिन तकनीकी कारण से नेत्रदान और त्वचा दान संभव नहीं हो पाया। उनकी इच्छा के अनुरूप परिजनों ने वर्मा की पार्थिव देह शुक्रवार सुबह दस बजे अंतिम यात्रा के बाद शहर के एक निजी मेडिकल कॉलेज को दान स्वरूप भेंट कर दी।
उन्हें यह सम्मान प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की उस मंशा के अनुरूप दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देहदान और अंगदान करने वाले मृतकों को राजकीय सम्मान दिया जाएगा।
इसी दौरान देहदान-अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में देहदानियों को गार्ड ऑफ ऑनर देने का जो निर्णय लिया था, उनकी उसी इच्छा के अनुरूप उसके बाद प्रशासन द्वारा इंदौर शहर में पहली बार स्वर्गीय वर्मा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया ।
वर्मा को राजकीय सम्मान के साथ बेहद सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। इस दौरान उनके परिवार के लोगों की आंखें राजकीय सम्मान के गर्व और स्वजन की अंतिम विदाई के गम के चलते नम हो गईं।
वर्मा ने 2011 में ‘महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति’ इंदौर के माध्यम से देहदान, अंगदान का संकल्प लिया था। वर्मा की अंतिम यात्रा के बाद उनकी पार्थिव देह अरविंदो मेडिकल कॉलेज को डोनेट की गई। शासन के निर्देश के मुताबिक प्रशासन द्वारा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।
खास बात यह कि वर्मा ने कुछ साल पहले अपने बेटे की अकाल मृत्यु होने पर भी उसकी देह दान करवाई थी। बता दें कि वर्मा ने राजबाड़ा क्षेत्र स्थित अपनी दवाई की दुकान पर दधीचि देहदान अंगदान समिति का पोस्टर लगा रखा था। वे नागरिकों और संबंधियों से देहदान और अंगदान के लिए संकल्प पत्र भरवाते रहें।
वर्मा के देहदान के मौके पर महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति के सदस्यों सहित संस्थापक सदस्य नंदकिशोर व्यास ने श्रद्धांजलि अर्पित कर समाज की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया । दधीचि ब्राह्मण समाज के संस्थापक और समाजसेवी नंदकिशोर व्यास ने बताया कि अशोक वर्मा कुप्रथा और संकीर्ण रूढ़ीवादी परम्पराओं के खिलाफ थे। उन्होंने अपने बेटे की अकाल मृत्यु होने के बाद बहू का भी बेटी की तरह कन्यादान कर उसका पुनर्विवाह भी किया।
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