पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक
विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून को मनाया जाता है, जो हमें पर्यावरण संरक्षण के महत्व की याद दिलाता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि हमें यह सोचना होगा कि हम प्रकृति से क्या ले रहे हैं और उसे बदले में क्या दे रहे हैं।यह दिन प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को समझने और प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर ध्यान देने का अवसर है।
क्या आप जानते है कि जिस जहरीली हवा में हम सांस ले रहे हैं, वह हमारे दिल को बीमार बना रही है। हाल के दिनों में युवाओं में बढ़ रहे हार्ट अटैक और कम उम्र में मौतों के बढ़ते मामले चौंकाने वाले हैं। हमारा पर्यावरण, जिसमें हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जंतु शामिल हैं, यह सब हमारे जीवन का आधार है। लेकिन मानवीय गतिविधियों के कारण यह गंभीर खतरों का सामना कर रहा है – प्रदूषण, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता का नुकसान।
बिगड़ी हुई हवा में सांस लेने वाला व्यक्ति रोजाना लगभग दो पैकेट सिगरेट जितना धुआं अपने फेफड़ों में भर रहा है। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों में हाई बीपी के साथ दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। हवा में मौजूद जहरीले कण व अन्य रसायन सांसों के जरिये खून में मिलकर दिल को उतना ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। जितना हाई कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन और अनियंत्रित डायबिटीज पहुंचाती है। तनाव और खराब लाइफस्टाइल इसमें आग में घी का काम कर रहे हैं।
हमें अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखने और टिकाऊ जीवन शैली अपनाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने होंगे। हमारे स्वस्थ जीवन के लिए मोबाइल स्क्रीन के साथ ही फास्ट फूड से दूरी हृदय के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अपनों से अपने दिल की बात शेयर करना, वर्ताव ठीक रखना, गुस्सा कम करना। हमें अपने जीवन में एक्सरसाइज जरूर करी चाहिए ।एक्सरसाइज जीवन में 12 से 15 साल का इजाफा करता है। देश में हो रही 30 फीसदी मौतों की वजह कार्डियोवैस्कुलर बीमारी या हार्ट अटैक होते है ।
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