पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक :
कर्नाटक में ईवीएम पर हुए एक सर्वेक्षण में 85% मतदाताओं ने इस पर भरोसा जताया, जिससे 2024 लोकसभा चुनाव को स्वतंत्र-निष्पक्ष बताया गया। कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव पर सर्वे में ईवीएम पर जनता ने मजबूत भरोसा दिखाया है।
राहुल गांधी काफी समय से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे है। चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने कर्नाटक में वोट चोरी के सबूत भी पेश करने का दावा किया। ऐसे में राज्य सरकार की एजेंसी का सर्वे के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। एक ओर जहां भाजपा ने इस सर्वे को कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ वाली थ्योरी पर करारा जवाब बताया, तो वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खर्गे ने सर्वे को राज्य सरकार से अलग बताते हुए इसकी डिजाइन, सर्वे करने वाली एजेंसी और नमूने के आकार पर सवाल उठाए।
हैरानी की बात यह है कि यह रिपोर्ट किसी विपक्षी पार्टी या निजी एजेंसी की नहीं, बल्कि खुद कर्नाटक सरकार की एक संस्था की है। इस सरकारी अध्ययन में पाया गया है कि कर्नाटक के लोग न केवल भारतीय चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष मानते हैं, बल्कि उन्हें ईवीएम पर भी पूरा भरोसा है। अब कांग्रेस शासित कर्नाटक से ही एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने इन सारे दावों की हवा निकाल दी है।
कर्नाटक सरकार की एजेंसी के सर्वे में ईवीएम पर जनता की ओर से मजबूत भरोसा जताए जाने के बाद भाजपा और शिवसेना ने कांग्रेस और सांसद राहुल गांधी पर पलटवार किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कई बार भाजपा और केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर ईवीएम में हेराफेरी और ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। इस सर्वे पर भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख बीवाई विजयेंद्र ने X पर खुशी जताते हुए पोस्ट किया, ‘कांग्रेस’ की ‘वोट चोरी’ एक बार फिर बेनकाब हो गई! कर्नाटक सरकार द्वारा प्रकाशित सर्वेक्षण रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि हमारे लोगों का एक बड़ा बहुमत मानता है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से आयोजित किए जाते हैं।
वहीं इस सर्वे के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने एक्स पर लिखा, वर्षों से राहुल गांधी पूरे देश में यही कहानी सुनाते रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र ‘खतरे’ में है, ईवीएम ‘अविश्वसनीय’ हैं और हमारे संस्थानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लेकिन कर्नाटक ने बिल्कुल अलग कहानी बताई है।
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