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कफ सिरप मामले में की गई अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की खारिज

पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक :

उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त (नशीले कफ सिरप ) कफ सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी के मामले में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल समेत सभी 40 आरोपियों को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

प्रदेश के चर्चित कफ सिरप मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने सोमवार (15 दिसंबर 2025) को FIR रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली 22 याचिकाओं को खारिज कर दिया। मुख्य आरोपी शुभम अग्रवाल समेत 40 आरोपियों ने गिरफ्तारी से रोक लगाने और एफआईआर रद्द करने मांग को लेकर अर्जी दाखिल की थी।शुक्रवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों की अर्जी खारिज कर दी। इसके साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। इससे पुलिस अब कभी भी आरोपियों को गिरफ्तार कर सकती है। सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया है


2 दिसंबर 2025 को मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हुई, जो मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रहा है। ED के निशाने पर 50 आरोपी हैं।कोडीनयुक्त कफ सिरप कांड की जांच में यूपी एसटीएफ ने लखनऊ आलम बाग के पास से सहारनपुर से दो अभियुक्त अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को गिरफ्तार किया था। एक हफ्ते पहले ED ने लखनऊ, रांची, अहमदाबाद समेत देशभर में 25 ठिकानों पर छापेमारी की। पूछताछ में 25 हजार रुपये के इनामी शुभम जायसवाल का पूरा नेटवर्क सामने आया है। दोनों ने एसटीएफ को बताया कि दोनों विशाल और विभोर राणा के लिए काम करते थे। विशाल और विभोर का शुभम जायसवाल के साथ व्यापारिक संबंध था। 

सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट में कहा- ‘कफ सिरप में कोडीन फॉस्फेट नामक तत्व मिला है, जिसका उपयोग सिर्फ नशे के लिए किया जा रहा था। इसलिए मामला NDPS एक्ट का है, जिसके प्रावधानों का याचियों ने उल्लंघन किया। फर्जी फर्म बनाकर सिर्फ कागज पर ट्रांजैक्शन दिखाए गए। वास्तव में कफ सिरप को चोरी-छिपे नशे के लिए कई राज्यों में भेजा गया।’

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