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कथावाचक अपने बयानों के कारण चल रहे विवादों में

पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक

प्रेमानंद महाराज और अनिरुद्धाचार्य जैसे प्रसिद्ध कथावाचक हाल ही में अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे हैं। प्रेमानंद महाराज ने लिव-इन रिलेशनशिप को ‘गंदगी का खजाना’ बताया और महिलाओं के चरित्र पर टिप्पणी की। वहीं, अनिरुद्धाचार्य ने बाल विवाह की वकालत करते हुए 14 साल की उम्र में लड़कियों की शादी की बात कही और महिलाओं के चरित्र पर विवादित टिप्पणी की। “लड़कियां चार जगह मुंह मार चुकी होती हैं,” कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के इस विवादित बयान पर बवाल मच गया। लिव-इन रिलेशनशिप को “अपवित्र” बताने वाले अनिरुद्धाचार्य ने भारी विरोध के बाद माफी तो मांग ली है, लेकिन साथ ही यह भी दावा किया कि उनके वीडियो को काट-छांटकर पेश किया गया और उन्हें बदनाम करने की साजिश है। मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है, क्योंकि महिला वकीलों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कोर्ट में याचिका दायर कर दी है।

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें वे कहते नजर आ रहे हैं कि ‘आजकल 100 में से 2-4 लड़कियां ही पवित्र रही हैं, बाकी सब बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के चक्कर में पड़ी हैं।’ यह बयान एकांत वार्तालाप का हिस्सा था, लेकिन किसी ने उसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और अब वह क्लिप पूरे देश में बहस का मुद्दा बन चुकी है।

सोशल मीडिया से लेकर घर तक लोग इस बहुस में शामिल हो रहे । कई लोग धर्मगुरुओं के दिए बयान पर सहमति जताते नजर आते हैं तो वहीं दूसरी ओर वैसी लोगों की भी एक बड़ी संख्या है, जो इन बयानों के कारण कथावचकों और धर्मगुरुओं की आलोचना भी करते नजर आ रहे हैं। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य, प्रेमानंद जी महाराज के अब इस महिलाओं पर विवादित टिप्पणी करने वाले धर्मगुरुओं में नया नाम साध्वी ऋतंभरा भी का जुड़ा गया,जब साध्वी ऋतंभरा ने लड़कियों को लेकर की अपनी विवादित टिप्पणी में कहा है कि इन दिनों हिंदू लड़कियां नंगी होकर पैसे कमा रही हैं। गंदे ठुमके लगाकर पैसे कमाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि, आजकल कुछ संत सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए ‘कंट्रोवर्शियल’ बातों का सहारा ले रहे हैं। यह एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है, जिसमें आत्मप्रचार के लिए धर्म और समाज दोनों की मर्यादा को ताक पर रख दिया जाता है। अगर यह चलन नहीं रुका, तो आने वाली पीढ़ियों की धार्मिक आस्था पर इसका गहरा असर हो सकता है।

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