पूनम शुक्ला: मुख्य प्रबंध संपादक :
लखनऊ में पिता की हत्या करने वाले अक्षत का व्यवहार पूरी तरह बदल हुआ दिख रहा है ख़बर के अनुसार अक्षत प्रताप सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। वो जेल मे भी रोता तो कभी पछतावे की बात करता दिखा। जेल में अक्षत की पहली रात बेचैनी में कटी। पूरी रात दीवार से टिककर बैठा बड़बड़ाता रहा। वहीं पिता की हत्या के बाद वह बहन से लिपटकर रोया था और जेल जाने से पहले उसने बहन को रुपए भी भेजे।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना सेक्टर-एल में कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। लखनऊ के इस पॉश इलाक़े में 20 फरवरी से गायब एक कारोबारी का धड़ उनके घर से ही एक ड्रम से बरामद किया गया है।लखनऊ का यह ‘नीला ड्रम कांड’ अब सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटते ताने-बाने की भयावह तस्वीर बन चुका है। खबर के अनुसार शव के कई टुकड़े किए गए थे और कुछ टुकड़े शहर के एक हिस्से में फेंके भी गए थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात की रात बेटा अक्षत और पिता दोनों नशे में थे। आरोप है कि पिता के भला-बुरा कहने पर गुस्से से तमतमाए अक्षत ने घर में मौजूद लाइसेंसी राइफल से गोली दाग दी। एक ही पल में बाप-बेटे का रिश्ता खून से रंग गया और आलीशान घर मौत का मंजर बन गया। पिता मानवेंद्र प्रताप सिंह (49) जालौन के रहने वाले थे और लखनऊ में कारोबार करते थे।
पुलिस ने उनकी हत्या के मामले में उनके बेटे, 21 साल के
अक्षत प्रताप सिंह को गिरफ़्तार किया है। आरोप है कि पिता के भला-बुरा कहने पर गुस्से से तमतमाए अक्षत ने घर में मौजूद लाइसेंसी राइफल से गोली दाग दी।
पुलिस के अनुसार मानवेंद्र प्रताप सिंह और उनके बेटे के बीच पढ़ाई को लेकर विवाद चल रहा था।अक्षत बी कॉम का छात्र है ।पिता मानवेंद्र सिंह अपने बेटे पर नीट (मेडिकल) परीक्षाओं की तैयारी करने और मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने के लिए दबाव बना रहे थे। इस बात को लेकर पिता-पुत्र में कई महीनों से तनाव चल रहा था।
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