पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक
यूपी में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पौने तीन करोड़ गणना फॉर्म अभी तक वापस नहीं आए हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग गंभीर है। उत्तर प्रदेश के अनुरोध को देखते हुए एक सप्ताह का समय और दिया जा सकता है। एक बार फिर एसआईआर की अवधि बढ़ाई जा सकती है, ताकि सभी फार्म जमा हो सकें।
चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया है कि BLO’s की तरफ से तकरीबन 2 करोड़ 75 लाख मतदाताओं के गणना फॉर्म नहीं अब तक नहीं आ पाए हैं। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए एक बीएलओ की ओर से करीब 17.7% (पौने तीन करोड़) मतदाताओं के गणना फॉर्म इकट्ठा न हो पाने की रिपोर्ट दी गई है। इसे देखते हुए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने चुनाव आयोग से एसआईआर के लिए और समय देने का अनुरोध करने का फैसला किया है।
नया फैसला 11 दिसंबर से पहले कभी भी आ सकता है।
पहले 30 नवंबर को गणना फॉर्म भरने की तिथि 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के अनुरोध को देखते हुए एक सप्ताह का समय और दिया जा सकता है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया कि चेक कराएं कि क्या वाकई इन फॉर्मों के वापस आ पाने की स्थिति नहीं है। प्रदेश में 80% गणना फॉर्म वापस आ चुके हैं, जबकि 17.7% फॉर्म जमा हो पाने की स्थिति में ही नहीं हैं। यह आंकड़ा बड़ा है। बाकी फार्म के लिए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलों के डीएम से रिपोर्ट मांगी है।
सीएम योगी सोमवार को एसआईआर की समीक्षा के लिए पहुंचे। आगरा, मुरादाबाद में भी उन्होंने बैठक कर एसआईआर के कार्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोकतंत्र के लिए बूस्टर डोज है। वहीं, बीजेपी नेताओं की सुस्ती को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी के घर शादी भी है तो भी कोई एक आदमी शादी के काम से अलग SIR का काम कराए।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनप्रतिनिधियों का आह्वान कर कहा कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उनके नाम वोटर लिस्ट से हटवाएं और उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजने की प्रक्रिया शुरू करें। एक तरफ अवैध घुसपैठियों और संदिग्ध लोगों पर मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सख्ती कर रखी है। तो दूसरी तरफ अपने सभी जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री लगातार बैठक कर सभी को इस बात को सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी सूरत में एक भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए।
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