पूनम शुक्ला : मुख्य प्रबंध संपादक :
छठ पर्व बिहार में बड़े धूम – धाम से मनाया जाता है। बड़ी ही धूमधाम और उत्साह से मनाया जाने वाले इस पर्व की 25 अक्टूबर यानी आज शनिवार को नहाय खाय के साथ शुरुआत हो चुकी है। वहीं, उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यानी 28 अक्टूबर, मंगलवार को इसका समापन होगा।
छठ पर्व का व्रत बेहद कठिन होता है। इस त्योहार में साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष रूप से ख्याल रखा जाता है। छठ पूजा पूरी तरह श्रद्धा, आस्था और पवित्रता पर आधारित है। इसमें व्रती स्वयं ही पुरोहित और यजमान बनकर पूजा करते हैं। नहाय-खाय से लेकर खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातःकालीन अर्घ्य तक हर चरण में केवल लोक आस्था और भक्ति की भावना प्रमुख रहती है।
छठ पर्व, छइठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को आम तौर पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक पर्व है।
छठ पूजा का आरंभ नहाय खाय के इस दिन महिलाएं स्नान करके पूजा करती हैं। साथ ही, लौकी की सब्जी, दाल , गुड और कद्दू जैसी कुछ विशेष चीजों को शुद्धता के साथ बनाकर ग्रहण किया जाता है। नहाय खाय के दिन बिना लहसुन-प्याज वाली लौकी की सब्जी सेंधा नमक में जरूर बनाई जाती है। इस दिन से व्रती महिलाएं और परिवार के सदस्य भी इस सात्विक भोजन करते हैं। इसमें गुड़ का सेवन करना काफी लाभदायक होता है, गुड़ की तासीर गर्म होने की वजह से यह शरीर को गर्म बनाए रखने में मदद करता है। इससे महिलाओं को व्रत में भी ठंडे पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की शक्ति मिलती है।
26 अक्टूबर को खरना के दिन से महिलाओं का व्रत शुरू हो जाता है। इसमें 36 घंटों तक निर्जला व्रत रखने का विधान होता है। छठ पूजा के दिन व्रती को नदी में खड़े होकर अर्घ्य देना होता है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। मान्यता है कि छठ पर्व में व्रत रखने वाली महिलाओं और परिवार के सदस्यों को इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। यही सरलता और आत्मसमर्पण
छठ पूजा को सबसे विशेष और पवित्र बनाते हैं।
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