संसद सत्र से पहले 20 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, जिसमें बताया गया कि इस सत्र में सरकार 15 बिल लाएगी।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हंगामे और स्थगन के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष का नेता होने के बावजूद उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक नया तरीका अपना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर उन्होंने कहा, ‘आपने देखा कि कैसे एक मिनट में निकल गए.’ अगर वे अनुमति दें तो चर्चा हो सकती है, लेकिन मुद्दा यह है कि परंपरा कहती है कि अगर सरकार के नेताओं को बोलने की अनुमति है, तो हमें भी जगह दी जानी चाहिए। हम बोलना चाहते थे, लेकिन हमें अनुमति नहीं दी गई।’
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राहुल ने संसद भवन के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘रक्षा मंत्री और सरकार के अन्य लोगों को बोलने की इजाजत है, लेकिन विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा। मैं विपक्ष का नेता हूं, बोलना मेरा अधिकार है, मुद्दे उठाना मेरा काम है, लेकिन वे मुझे बोलने नहीं दे रहे।’
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि दि सदस्य नोटिस देते हैं, तो वह उन्हें सभी मुद्दे उठाने की अनुमति देंगे और प्रत्येक सांसद को पर्याप्त समय देंगे। बता दें कि संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अलावा केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा समेत कई अन्य दलों के नेताओं को मिलाकर 54 लोग शामिल हुए। सरकार के सूत्रों का कहना है कि सत्र में आठ नए और नौ लंबित विधेयक पेश करने की है।
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