केकेपी न्यूज़ ब्यूरो :
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार को संविधान के अनुच्छेद -21 के तहत सम्मान जनक जिंदगी जीने के अधिकार का उलंघन बताते हुये कहा है कि माता-पिता के साथ क्रूरता,उपेक्षा या उनका परित्याग करना पवित्र नैतिक कर्तव्य से वंचित होना है |
न्यायमूर्ति महेश चन्द्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि बच्चों के लिए बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना उनका पवित्र नैतिक कर्तव्य के साथ वैधानिक दायित्व है | हाईकोर्ट ने कहा कि जब “पुत्रवत’ कर्तव्य समाप्त हो जाता है तो न्यायालयों को कमजोर बुजुर्गों की रक्षा के लिए करुणा के अंतिम गढ़ के रूप में उभरना चाहिए |
दरअसल,पीड़ित राम दुलार गुप्ता की याचिका पर आदेश पारित करते हुये खंडपीठ ने कहा कि शारीरिक शक्ति कम होने के साथ बीमारियाँ बढ़ती जाती है | माता-पिता, दान दान में कुछ नहीं चाहते, बल्कि उन्हीं हाथों से सुरक्षा, सहानुभूति और उन्हीं का साथ चाहते हैं जिसे उन्होंने कभी थामा था और जिनका पालन-पोषण किया था | इसके बाद राम दुलार गुप्ता के बेटों ने कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी और आश्वासन दिया कि ऐसा व्यवहार दोबारा नहीं होगा |
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