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बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

पूनम शुक्ला :: मुख्य प्रबन्ध संपादक :

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) पर भी तीखी टिप्पणी की है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद कंपनी की ओर से किये जा रहे गलत दावे वाले प्रचार के सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने आईएमए को कहा कि यदि आप नैतिकता की बात करते हैं तो आपको अपनी ओर भी देखने की जरूरत है। आईएमए की ओर से भी अनैतिक तौर तरीके अपनाने की शिकायतें अदालत में मिलती रही हैं।

अदालत ने कहा कि आपके आईएमए के चिकित्सक भी महंगी और गैर जरूरी दवाइयां लिखते हैं। इतना ही नहीं, बेंच ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “जब आप एक उंगली किसी की ओर उठाते हैं तो चार आपकी और भी उठती हैं”। कोर्ट ने फिर कहा कि आपके आईएमए के डॉक्टर भी महंगी दवाइयां का प्रचार एलोपैथिक फील्ड में करते हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो फिर आपसे सवाल क्यों ना किया जाए।

कोर्ट ने सुनवाई का दायरा बढ़ाते हुए फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनियों को भी शामिल कर लिया है। कोर्ट ने कहा कि यह कंपनियां भी जनता को भ्रमित करने वाले विज्ञापन दे रही हैं । यह शिशु विद्यार्थियों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से राज्यों को मेडिसिन एंड ड्रग्स एक्ट के नियम 170 के तहत कार्यवाही न करने के लिए अगस्त 2023 में लिखे गए पत्र पर भी जवाब मांगा है।

भ्रामक विज्ञापन मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को रामदेव और पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने गलती के लिए अपनी ओर से देश भर के 67 अखबारों में सार्वजनिक तौर पर बिना शर्त माफी मांगी है। रोहतगी ने कोर्ट में यह भी कहा कि सोमवार को ही विज्ञापन प्रकाशित हुआ है। कोर्ट ने माफ़ीनामें के आकार पर सवाल किया, कोर्ट ने कहा कि माफीनामा बड़ा छपना चाहिए । इसके बाद कोर्ट ने माफीनामे को रिकॉर्ड में पेश करने के लिए समय देते हुए सुनवाई 30 अप्रैल तक टाल दी ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अखबार में छपी माफ़ीनामें की कतरन कोर्ट में दाखिल की जाए, ना कि उसकी फोटो कॉपी का बड़ा आकर पेश करें। जस्टिस सीमा कोहली व जस्टिस आसहानुदीन अमानुल्लाह के पीठ ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन के मामले में दाखिल आईएमए की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान साफ किया कि कोर्ट के निशाने पर कोई विशेष कंपनी या व्यक्ति नहीं है। यह लोगों की सेहत से जुड़ा मुद्दा है। उपभोक्ताओं के हित का मुद्दा है । लोगों को पता होना चाहिए कि वह किस रास्ते पर जा रहे हैं।

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