20 साल की उम्र बताकर कराया नाबालिक का गर्भपात
दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के अवैध गर्भपात और अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं देने के आरोपी डॉक्टर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट करते हुए कहा कि मेडिकल प्रक्रिया से पहले मरीज की सही उम्र और पहचान सत्यापित करना डॉक्टर का दायित्व है।
एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें आरोप है कि एक नाबालिग लड़की की उम्र दस्तावेजों में 20 वर्ष दर्शाकर उसका गर्भपात कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में उम्र से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर या कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गर्भपात के दौरान मेडिकल और कानूनी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
आरोप है कि लड़की ने अस्पताल के रिकॉर्ड में अपनी सही जन्मतिथि दर्ज की थी, लेकिन डॉक्टर ने कथित तौर पर स्टाफ से उसकी उम्र 20 साल दर्ज करने को कहा। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस और संबंधित स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, अस्पताल में जमा किए गए दस्तावेजों में युवती की उम्र 20 वर्ष दर्ज थी। जबकि अन्य दस्तावेजों की जांच में उसकी वास्तविक उम्र कम होने की बात सामने आने का दावा किए जाने के बाद मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया।
यह मामला जुलाई 2019 का है। आरोप है कि एक अस्पताल में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का करीब छह सप्ताह का गर्भपात कराने से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने बताया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत नाबालिग लड़की गर्भपात के लिए स्वतंत्र रूप से सहमति नहीं दे सकती। इसके लिए अभिभावक की लिखित रूप से अनुमति लेना जरूरी होती है।
वहीं, पॉक्सो एक्ट की धारा 19 के तहत डॉक्टरों को नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी पुलिस को देना अनिवार्य है इसका उल्लंघन करने पर पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि आधिकारिक जांच पूरी होने तक किसी भी अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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