नई दिल्ली:
9 जुलाई 2026 के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े एक पुराने मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले और उसमें की गई कुछ टिप्पणियों से संबंधित है।
मामले में पटना हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लगाए गए आरोप दुष्कर्म के प्रयास के अपराध को स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हाईकोर्ट के अनुसार, मामले में महिला को एक स्थान पर रोकना, कपड़े हटाने का प्रयास करना और उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ करना महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित अपराध के दायरे में आता है।
इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर आपत्ति दर्ज की और मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपी को नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों को बदलने या हटाने से पहले आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी है। अदालत ने बिहार सरकार को स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी तक नोटिस पहुंचाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले में दर्ज कानूनी निष्कर्षों और टिप्पणियों की समीक्षा करेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से अंतिम फैसला नहीं आया है। इसलिए मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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