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लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना एक गंभीर समस्या-इलाहाबाद हाईकोर्ट

पूनम शुक्ला:मुख्य प्रबन्ध संपादक:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण की प्रवृत्ति को लेकर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि धार्मिक सभा में धर्मांतरण की प्रवृत्ति जारी रही तो एक दिन भारत की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी। कोर्ट ने कहा कि धर्मांतरण करने वाली धार्मिक सभाओं पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में एससी/एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का ईसाई धर्म में अवैध धर्मांतरण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

लालच देकर धर्म बदलने का खेल जारी रहा तो देश की बहुसंख्यक आबादी एक दिन अल्पसंख्यक बन जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने हिंदुओं को ईसाई बनाने के आरोपित मौदहा हमीरपुर के कैलाश की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के तहत दर्ज कैलाश की जमानत याचिका पर सुनवाई की ।

हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आयोजन संविधान के अनुच्छेद-25 द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विरुद्ध है। यह अनुच्छेद किसी को भी धर्म मानने व पूजा करने व अपने धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। धर्म प्रचार की स्वतंत्रता किसी को धर्म परिवर्तन कराने की अनुमति नहीं देती। कोर्ट ने कहा की जानकारी में आया है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजन के जरिए भोले भाले गरीब लोगों को गुमराह कर ईसाई बनाया जा रहा है।

ऐसे में धर्म परिवर्तन कराने के आरोप की गंभीरता को देखते हुए याची को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। रामकली प्रजापति ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता रामकली प्रजापति ने एफआईआर में कहा था कि उसके भाई रामफल को कैलाश घर से दिल्ली में एक सामाजिक समारोह में भाग लेने के लिए ले गया था। जोकि मानसिक रूप से बीमार था | उसको याची एक हफ्ते के लिए दिल्ली ले गया और कहा कि इलाज करवा कर गांव वापस भेज देंगे। किंतु भाई वापस नहीं आया। जब आया तो गांव के तमाम लोगों को दिल्ली में आयोजित आयोजन में ले गया | वहां उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी गांव से लोगों को दिल्ली में धार्मिक समारोहों में भाग लेने के लिए ले गया और उनमें से अधिकांश लोग कभी घर वापस नहीं लौटे। इस समारोह में गांव के कई और लोगों को भी ले जाया गया। बाद में, सभी को लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया।

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