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पराली दहन को लेकर पंजाब सरकार को सुप्रीमकोर्ट की फटकार

पूनम शुक्ला:मुख्य प्रबन्ध संपादक:

वायु प्रदूषण का एक मुख्य कारण बने पराली दहन के चलते सुप्रीमकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुये कहा है कि पंजाब को हरियाणा से सीख लेनी चाहिए | जिसने किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन देकर एक बड़ी हद तक पराली जलाने से रोकने में सफलता हासिल की है |

सुप्रीमकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुये यह भी पूछा है कि पराली जलाने वाले किसानों पर कितना जुर्माना लगाया और वसूला गया ? साथ ही सुप्रीमकोर्ट ने पंजाब सरकार से यह भी कहा कि आखिर पराली जलाने वाले किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्यों दिया जाना चाहिए ? निःसंदेह पराली को जलाने से रोकना ही होगा | लेकिन इसी के साथ यह भी समझना होगा कि किसानों को मजबूरी में पराली को जलाने पड़ते हैं |

यह निराशा जनक है कि बीते लगभग दस वर्षों से यह कोशिश हो रही है कि पंजाब,हरियाणा,पश्चिमी उत्तर प्रदेश व राजस्थान आदि में पराली जलाये जाने का सिलसिला थमें, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है | यदि यह समझा जा रहा है कि पराली जलाने वाले किसानों को सिर्फ दंडित कर समस्या का समाधान किया जा सकता है तो यह संभव नहीं है | इस समस्या का समाधान तब होगा, जब किसानों को ऐसे विकल्प उपलब्ध कराये जाएँ, जिससे कि वे पराली जलाने को विवश न हों |

किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ पराली का निस्तारण करने वाली मशीनें उपलब्ध कराई जाय या खेतों से पराली हटाने की कोई उचित व्यवस्था की जाय | जाहिर है कि सुप्रीमकोर्ट दिल्ली -एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का संज्ञान ले रहा है | लेकिन माननीय सुप्रीमकोर्ट को उत्तर व मध्य भारत की तरफ भी ध्यान देना होगा | जहाँ वायु की गुणवत्ता इतनी खराब है कि यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है |

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