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अमेरिका में महिलाएं सेक्स हड़ताल पर

केकेपी न्यूज़ ब्यूरो:

अमेरिका में इन दिनों अजीबो गरीब हड़ताल का माहौल चल रहा है | यहाँ लगभग सभी प्रांत में महिलाओं का धरना प्रदर्शन जारी है | महिलाएं सेक्स स्ट्राइक,नो मोर सेक्स,एबॉर्शन इस माय राईट इत्यादि लिखे बैनर पोस्टर के साथ अपनी फोटो भी शेयर कर रही हैं | महिलाओं का कहना है कि हम अनचाहे गर्भ को नहीं रख सकते | इसलिए हम अपने पति सहित किसी भी पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनायेंगे |

इन प्रदर्शनकारी महिलाओं में शामिल कुछ महिलाओं का कहना है कि हमारी इस लड़ाई में पुरुषों को भी साथ आना चाहिए | यदि पुरुष अपनी पत्नी के अधिकारों के लिए नहीं लड़ सकता है तो वह उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लायक नहीं है | कई महिला समूहों का कहना है कि रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करने वाले पुरुषों के साथ सेक्स न करने की अपील सभी अमेरिकन महिलाओं से की जायेगी |

दरअसल ये पूरा मामला दो दिन पहले अमेरिकन सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर आधारित है | 24 जून 2022 को सुप्रीमकोर्ट ने गर्भपात को क़ानूनी तौर पर मंजूरी देने वाले अपने 50 साल पुराने “रो बनाम वेड” केस में दिए गए फैसले को पलटते हुए गर्भपात कानून -1973 को समाप्त कर दिया था | गर्भपात कानून के समाप्त हो जाने से पूरे अमेरिका में महिलाओं का जबरदस्त प्रदर्शन हो रहा है | कई जगह तो तोड़फोड़ की घटनाएँ भी देखने को मिली हैं | सबसे ज्यादा प्रदर्शन न्यूयार्क में हो रहा है | यहाँ महिला समूहों का कहना है कि जब तक “रो बनाम वेड” केस को पुनः मान्यता नहीं मिल जाती तब तक यहाँ कि कोई भी महिला किसी भी पुरुष के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनायेगी | चाहे उसका पति ही क्यों ना हो |

दरअसल, अमेरिका में सन् 1971 में 22 साल की नोर्मा मैककोर्वे यानी रो गर्भपात कराने में नाकाम रहीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षित गर्भपात को आसान बनाने के लिए एक याचिका दायर की। साथ ही रो ने मांग रखी कि गर्भधारण और गर्भपात का फैसला महिलाओं का होना चाहिए, न कि सरकार का। इसी याचिका पर सुप्रीमकोर्ट ने सन् 1973 को गर्भपात  को न सिर्फ कानूनी मान्यता दी बल्कि सभी राज्यों के उन कानूनों को भी रद्द कर दिया जो गर्भपात को अवैध मानते थे।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान महिलाओं को गर्भपात से जुड़ा फैसला लेने का अधिकार देता है। यह ऐतिहासिक फैसला दुनिया भर में गर्भपात कानूनों के लिए एक बेंचमार्क बन गया।

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